अवसाद, संवेगात्मक उपेक्षा व शैक्षणिक दबाव मानसिक महामारी छात्रों के बीच निराशा व आत्महत्या का मुख्य कारण : डॉ सतरूपा श्रीवास्तव

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जमशेदपुर : ‘सक्षम महिला, निर्भर महिला’, पूर्वी सिंहभूम के तत्वाधान में आज मनोबल पे लाइव संवाद कार्यक्रम का दूसरा सत्र संपन्‍न हुआ। ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन, जमशेदपुर के भूतपूर्व प्रिंसिपल डॉ सतरूपा श्रीवास्तव ने कोविड-19 काल में छात्रों की मनोदशा के ऊपर प्रकाश डाला और उनके जीवन में माता-पिता, परिवार, समाज व शिक्षक की महत्‍वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट किया। डॉ सतरूपा श्रीवास्तव ने बहुत सारे शोधों का उल्लेख करते हुए सभी का ध्यान अवसाद, संवेगात्मक उपेक्षा तथा शैक्षणिक दबाव नामक मानसिक महामारी की ओर केंद्रित किया जो छात्रों के बीच निराशा व आत्महत्या का मुख्य कारण हैं। छात्र सबसे ज्यादा अपने दोस्तों के साथ समय बिताते रहे है पर कोविड-19 के कारण हम सभी का मिलना-जुलना लगभग बंद हो गया है, स्कूल भी बंद हैं। ये सभी परिस्थितियां मिलकर छात्रों की मनोदशा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे है। इस परिस्थितियां में हम सभी खास कर माता -पिता, छात्रों के साथ कुछ अच्छे पल बिताये और उनकी बात सुने। उनकी मनःस्थिति को समझे और देश, दुनिया व समाज के बारे में एक व्यापक दृष्टिकोण से उनको अवगत कराए। ये बहुत जरूरी है कि हम छात्रों को संकुचित दृष्टिकोण से बहार निकाले। हमे उनके रूचि व अरुचि को भी समझना चाहिए।

कार्यक्रम में कोविड-19 का समय महामारी के साथ-साथ आत्महत्या के सिलसिले से भी जोड़ा गया है। जिंदल ग्लोबल स्कूल के एक कोविड-19 के अध्ययन में पाया गया है कि 19 मार्च के 2 मई तक 338 लोगों ने आत्महत्या की है जिसमें 300 छात्र थे। कारण कोरोना वायरस भी यही था। लांसेट रिपोर्ट कहती है कि भारत में युवा रोड एक्सीडेंट के बाद शैक्षणिक कारणाें से ही मरते हैं। W.H.O ने भी कहा है कि युवाओं में आत्महत्या का एक कारण शैक्षणिक है। पूरे विश्व में भारत आत्महत्या के लिए नंबर पांच पर है। भारतीय नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 2016 में 230, 314 आत्महत्याएं हुई। छात्रों द्वारा यह 2016 में 9478, 2017 में 9905 और 2018 में 10159 हुईं है। इनमें महाराष्ट्र और राजस्थान के कोटा में सबसे ज्यादा हुआ है जो छात्रों का तीरथ है। एजुकेशनल हब यानी छात्रों के आत्महत्या का एक लिंक शिक्षा से जुड़ा है। इतने अधिक मात्रा में छात्रों के आत्महत्या से स्पष्ट है कि छात्र और आत्महत्या में कुछ तो ज्यादा ही तालमेल है कोविड-19 के समय यह स्थिति और भयानक हो सकती है जब शैक्षणिक वातावरण बहुत ही खराब है।

 

 

 

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