विश्व आदिवासी दिवस संकल्प एवं श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाया गया

0

रांची: समिति के अध्यक्ष मेघा उराव ने बताया है कि आज  झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति धुर्वा रांची की ओर से आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सरना स्थल सरना मां के समक्ष विभिन्न सरना संगठनों के द्वारा अपने पूर्वजों के प्रति हुए अत्याचार शोषण ,नरसंहार ,और पीड़ित परिवार के लिए भारत समेत 195 देशों के लिए 195 दिया जलाकर श्रद्धांजलि और नमन किया गया।

नमन करते हुए संकल्प लिया गया है कि हम अपने मूल जनजातियों के उनके धर्म ,संस्कार , संस्कृति, परंपरा, अस्तित्व ,अस्मिता और पहचान को हम मिटने नहीं देंगे हम हर हाल में इसका रक्षा सुरक्षा करेंगे । साथी इस अवसर पर सरकार से मांग किया गया है कि आदिवासी जनजातियों की धर्म और समाज की रक्षा हेतु धर्मांतरण निषेध बिल कानून 2017 को कड़ाई से लागू हो। दूसरा पेसा एक्ट सीएनटी/ एसपीटी एक्ट कानून को कड़ाई से पालन हो । चौथा झारखंड में जनजाति आयोग का गठन हो। पांचवा आदिवासियों का धार्मिक और सामाजिक जमीनों का रक्षा हो। छठा माननीय सुप्रीम कोर्ट 2004 के जजमेंट के आलोक में जो अपने मूल परंपरा संस्कार पूजा पद्धति को छोड़ दिया हो अर्थात धर्म बदल दिया हो वैसे आदिवासी जनजातियों को जनजाति सुविधा और आरक्षण से वंचित किया जाए ।

सातवां चर्च मिशनरी द्वारा जनजातियों का धार्मिक व सामाजिक जमीनों पर किए गए अतिक्रमण को चिन्हित कर मुक्त किया जाए।
मुख वक्ता जनजाति सुरक्षा मंच झारखंड प्रदेश के संयोजक संदीप उरांव ने कहां है कि संयुक्त राष्ट्र संघ पर टिप्पणी करने के लिए हम सक्षम नहीं है किंतु जनजाति ट्राईबल होने के नाते कर्तव्य बनता है कि विश्व के मूल जनजाति समाज के प्रति हुए अत्याचार और नरसंहार को स्मरण तो कर ही सकते हैं संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के समस्त आदिवासी ,जनजातियों के लिए रक्षा हेतु प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को आदिवासी दिवस अर्थात 9 अगस्त का दिन को चुनने के पीछे यू एन ओ वर्किंग ग्रुप और इंडीजीनस पॉपुलेशन की बैठक 9 अगस्त 1982 का दिन था इसलिए 9 अगस्त को ही यूएनओ द्वारा विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की गई।

जबकि भारत में इस दिवस को मनाने की कोई औचित्य नहीं है क्योंकि भारतीय संविधान 1950 में ही भारत के जनजाति समाज के लिए उनका हक अधिकार,समाज का रक्षा सुरक्षा संविधान में प्रदत हैं।
संदीप उराव ने कहां है कि अंतर्राष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस की पीछे का ओ इतिहास को छुपाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस ने 12 अक्टूबर 14 92 के दूसरे सोमवार के भारत की खोज में निकला गलती से अमेरिका के पूर्वी तट पर लंगर डाला उस दिन पूरी दुनिया के कई देश जहां पर उपनिवेशक कॉलोनियां हैं ,अवकाश घोषित है एवं कई तरह के उत्सव मनाए जाते हैं उस दिन यूरोपियन देश का दिन भी माना जाता है कोलंबस के द्वारा वहां के मूल निवासी ट्राइबल आदिवासियों के ऊपर अत्याचार ,शोषण और नरसंहार कराया गया ।

अमेरिकन एक्सप्रेस शोधकर्ताओं और अध्ययन के अनुसार 50 लाख लोगों को केवल कोलंबस काल में ही मार दिया गया है अगर दक्षिणी अमेरिका का आंकड़ा जोड़ा जाए तो लगभग करोड़ों लोगों का नरसंहार हुआ है जिसमें अमेरिकन ट्राईबल को रेड इंडियन भी कहा जाता है जिसमें चिकसा, मास्कोपी, क्रिक, जैसे 17 मूल् निवासी जनजातियों को अपने देशों से लगभग खत्म कर दिया गया

1830 ई मैं ट्राइबल रिमूवल पारित किया गया जिसका उद्देश लगभग डेढ़ लाख लोगों को अपने पैतृक स्थानों से मीशि सिपी के पश्चिमी मैं धकेला था। इसे इतिहास में ट्रेल ऑफ टीयर्स/आंसू की नदी कहा जाता है वहां से जानवरों की तरह भगाया जिसमें हजारों लोग रास्ते में ही मारे गए । यूरोपियन रेस के द्वारा किए गए नरसंहार, अत्याचार को छुपाने के लिए 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने का एक मुखौटा तैयार किया गया ।
केंद्रीय युवा सरना विकास समिति झारखंड के अध्यक्ष सोमा उरांव ने कहा है की एक तरफ कुछ लोग जनजाति समाज का अस्तित्व और परंपरा की रक्षा के बात करते हैं और दूसरी तरफ मूल परंपरा और अस्तित्व और पहचान को मिटाने में लगे हुए हैं इस तरह के दोहरा चाल दोहरा निती से बाज आए ।
इस आदिवासी विश्व आदिवासी दिवस /संकल्प दिवस में मुख्य रूप से पिंकी खोया, जेतेश्वर मुंडा, गुरुचरण मुंडा, अशोक महतो, जादो उराव, जय मंत्री उराव, कुमुदिनी लकड़ा,  एवं अन्य उपस्थित थे ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here