सामाजिक संकट के दौर में महिलाओं को अपनी क्षमता और व्यक्तित्व में विश्वास जगाना होगा : जस्टिस मनोज प्रसाद

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जमशेदपुर : कोविड 19 और भारत में स्त्रियों के विधिक अधिकारों पर वीमेंस कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन शनिवार को किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में जिला सिविल न्यायालय के मुख्य जिला व सत्र न्यायाधीश माननीय मनोज प्रसाद गूगल मीट ऐप्लीकेशन वेबलिंक के माध्‍यम से शामिल हुए। प्राचार्या सह प्रो डॉ शुक्ला महांती ने मौके पर कहा कि ढेरों कानून, हजारों नीतियों, सैकड़ों अध्यादेशों के बावजूद स्त्री उत्पीड़न नहीं रुक रहा है। हम लोकतंत्र के इस विशाल आंंगन में आज तक अपनी बच्चियों के लिए एक सम्मानजनक और सुरक्षित कोना देने में भी असफल रहे हैं। ऐसे में यह वेबिनार न केवल सभ्यता समीक्षा की दृष्टि से खास बन पड़ा है बल्कि सही समाधान की ओर भी ले जाने का प्रयास है।

मुख्य वक्ता जस्टिस मनोज प्रसाद ने कोरोना महामारी के दौर में महिलाओं की स्थिति पर चर्चा की और बढ़ते अपराधों के मद्देनजर महिला अधिकारों की बात करते हुए भारतीय संविधान में प्रदत्त कुछ महत्वपूर्ण अधिकारों की चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं के लिए संविधान में कई मजबूत कानून हैं। यह उन्हें कृपा नहीं बल्कि अधिकार के रूप में हासिल है। इनको जानना होगा और दूसरों को भी जागरूक करना होगा। हर जागरूक छात्रा आगे तीन को जागरूक करने का प्रयास करे तो सामाजिक बदलाव तय है। उन्‍होनें कहा कि आज के सामाजिक संकट के दौर में महिलाओं को अपनी क्षमता और व्यक्तित्व में विश्वास जगाना होगा। महिलाओं द्वारा किए गए दृश्य और अदृश्य कार्य किसी भी समाज को चलाए रखने के में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके योगदान के बिना सृष्टि की कल्पना तक नहीं हो सकती। इसलिए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने की बजाय अपने व्यक्तित्व और योगदान की सशक्त पहचान को उन्हें खुद सामने लाना होगा। जीवन में महिलाओं के योगदान का सम्मान ही अपना सम्मान होगा।

वे मजबूत और दृढ़ संकल्प बनें और अपने आप को कभी भी अबला ना समझें। बदलाव का इंतजार न करें बल्कि बदलाव लाने में अपनी अग्रणी भूमिका तय करें। हिम्मत और प्रयास की यह लड़ाई महिलाएं व बच्चियाँ पहले खुद से शुरू करते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र तक पहुंचाएं। उन्होंने छात्राओं की ओर से आये प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि यदि थाने में शिकायत दर्ज नहीं होती तो ऑनलाइन शिकायत का विकल्प हमेशा खुला है। आप सीधे न्यायालय में भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। आप निःशुल्क विधिक परामर्श पाने की भी अधिकारी हैं।

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